मंगलवार, 23 दिसंबर 2008

जिंदगी गोल नहीं


दो क़दम आगे बढ़ने पर
बहुत कुछ पीछे छूट जाता है,
जिंदगी वापस नहीं लौटती!
कुछ सम्बन्ध,
उड़ जाते हैं आसमानी परिंदे बन कर
कुछ चेहरे
जेहन से चिपके रहते हैं
झाड़ में उलझे
चीथड़ों की तरह
इंसान पेड़ नहीं,
चलता रहता है
तुम से फिर मिलन हो!
चाह है, विश्वास नहीं.
दुनिया गोल है
जिंदगी तो गोल नहीं...

10 टिप्‍पणियां:

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

तुम से फिर मिलन हो!
चाह है, विश्वास नहीं.
दुनिया गोल है
जिंदगी तो गोल नहीं...

सही कहा आपने ..बहुत सुंदर भावभीनी रचना

seema gupta ने कहा…

तुम से फिर मिलन हो!
चाह है, विश्वास नहीं.
दुनिया गोल है
जिंदगी तो गोल नहीं...
"bhut pyare or sunder shabdon se sje rachna...."

regards

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

दुनिया गोल है
जिंदगी तो गोल नहीं...
सच ही है!

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सही कहा...बहुत सुंदर..;बधाई।

डॉ .अनुराग ने कहा…

नही भाई कुछ ऐसे मोड़ भी होते है जिन पर बड़ा बड़ा इत्तेफाक लिखा होता है

राज भाटिय़ा ने कहा…

दो क़दम आगे बढ़ने पर
बहुत कुछ पीछे छूट जाता है,
लेकिन कभी कभी इत्तेफाक भी हो जाता है, ओर हम खडे खडे देखते रह जाते है, कुछ कर नही पाते... बेबस की तरह से...
जिन्दगी गोल ना सही लेकिन कुछ तो हे..
धन्यवाद, इस सुंदर नज्म के लिये

talib ने कहा…

koi shak!

naa! ba baa! naa!1!

bhai kavi ho gaya!

तरूश्री शर्मा ने कहा…

तुम से फिर मिलन हो!
चाह है, विश्वास नहीं.
दुनिया गोल है
जिंदगी तो गोल नहीं...
बढ़िया रचना है जाकिर जी, उम्दा। सच है किसी भी चीज या भाव की स्थिरता का कोई भरोसा नहीं।

seema gupta ने कहा…

"नव वर्ष २००९ - आप के परिवार मित्रों, स्नेहीजनों व शुभ चिंतकों के लिये सुख, समृद्धि, शांति व धन-वैभव दायक हो॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं "

regards

Indra ने कहा…

bahut bahut bahut sundar rachana..I am speechless ..