
दो क़दम आगे बढ़ने पर
बहुत कुछ पीछे छूट जाता है,
जिंदगी वापस नहीं लौटती!
कुछ सम्बन्ध,
उड़ जाते हैं आसमानी परिंदे बन कर
कुछ चेहरे
जेहन से चिपके रहते हैं
झाड़ में उलझे
चीथड़ों की तरह
इंसान पेड़ नहीं,
चलता रहता है
तुम से फिर मिलन हो!
चाह है, विश्वास नहीं.
दुनिया गोल है
जिंदगी तो गोल नहीं...
10 टिप्पणियां:
तुम से फिर मिलन हो!
चाह है, विश्वास नहीं.
दुनिया गोल है
जिंदगी तो गोल नहीं...
सही कहा आपने ..बहुत सुंदर भावभीनी रचना
तुम से फिर मिलन हो!
चाह है, विश्वास नहीं.
दुनिया गोल है
जिंदगी तो गोल नहीं...
"bhut pyare or sunder shabdon se sje rachna...."
regards
दुनिया गोल है
जिंदगी तो गोल नहीं...
सच ही है!
बहुत सही कहा...बहुत सुंदर..;बधाई।
नही भाई कुछ ऐसे मोड़ भी होते है जिन पर बड़ा बड़ा इत्तेफाक लिखा होता है
दो क़दम आगे बढ़ने पर
बहुत कुछ पीछे छूट जाता है,
लेकिन कभी कभी इत्तेफाक भी हो जाता है, ओर हम खडे खडे देखते रह जाते है, कुछ कर नही पाते... बेबस की तरह से...
जिन्दगी गोल ना सही लेकिन कुछ तो हे..
धन्यवाद, इस सुंदर नज्म के लिये
koi shak!
naa! ba baa! naa!1!
bhai kavi ho gaya!
तुम से फिर मिलन हो!
चाह है, विश्वास नहीं.
दुनिया गोल है
जिंदगी तो गोल नहीं...
बढ़िया रचना है जाकिर जी, उम्दा। सच है किसी भी चीज या भाव की स्थिरता का कोई भरोसा नहीं।
"नव वर्ष २००९ - आप के परिवार मित्रों, स्नेहीजनों व शुभ चिंतकों के लिये सुख, समृद्धि, शांति व धन-वैभव दायक हो॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं "
regards
bahut bahut bahut sundar rachana..I am speechless ..
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