बुधवार, 20 अगस्त 2008

वो लड़की

वो लड़की, वो पागल दीवानी-सी लड़की
वो किस्सों में लिपटी कहानी-सी लड़की
वो खेतों में चढ़ती दुपहरी का साया
वो शामों की अल्हड जवानी-सी लड़की
गोबर, पसीने की खुशबू से लथ-पथ
वो पनघट के गीतों की रानी-सी लड़की
मेरी खातिर मौसम की तरह बदलती
वो बर्फ, वो आग, वो पानी-सी लड़की
तालों में खिलती हुई एक कँवल-सी
वो नदियों-सी बहती तूफानी-सी लड़की
अंधेरों में जुगनू की मानिंद चमकती
जमीं पर उतरती आसमानी-सी लड़की
'जवाहर' नक्श आज तक है ज़हन पर
वो ज़ख्मों की हल्की निशानी-सी लड़की

12 टिप्‍पणियां:

Advocate Rashmi saurana ने कहा…

bhut sundar rachana. badhai ho. likhte rhe.

vinayprajapati ने कहा…

अपने लड़की का जो चित्र पंक्तियों में खींचा है वह सचमुच शानदार है!

Sudhir Srivastava ने कहा…

बहुत बढिया। ऐसी कविता बहुत कम पढने को मिलती है। लिखते रहे। वैसे ऐसी लड़की का पता मालूम हो तो बताना। मिलना चाहूँगा। शुध्द भारतीयता की झलक तो दिखा ही दी आपने।
धन्यवाद
सुधीर श्रीवास्तव

तरूश्री शर्मा, Tarushree Sharma ने कहा…

मेरी खातिर मौसम की तरह बदलती
वो बर्फ, वो आग, वो पानी-सी लड़की

अच्छा लिखा है आपने.... गहराई से आती आवाज की तरह....

Udan Tashtari ने कहा…

वाह! बहुत उम्दा,बधाई.

सतीश सक्सेना ने कहा…

अरे वाह ! बहुत सुंदर !

ज़ाकिर हुसैन ने कहा…

आप सभी का आभार की आपने अपना कीमती समय निकाल कर मेरी पोस्ट पढने
की कृपा की!
उम्मीद है आगे भी आपकी निष्पक्ष राय मुझे मिलती रहेंगी

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही अच्छी ओर साफ़ सुथरी कविता,
धन्यवाद

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

अरे वाह, बहुत खूब!

महामंत्री-तस्लीम ने कहा…

रूमानी जज्बों की दिलकश बयानी है आपकी यह कविता। बधाई।

अनुराग ने कहा…

मेरी खातिर मौसम की तरह बदलती
वो बर्फ, वो आग, वो पानी-सी लड़की
तालों में खिलती हुई एक कँवल-सी
वो नदियों-सी बहती तूफानी-सी लड़की
अंधेरों में जुगनू की मानिंद चमकती
जमीं पर उतरती आसमानी-सी लड़की


आहा ....एक एक लफ्ज़ जैसे सीने में उतर गया ....सुभान अल्लाह.....

नीरज गोस्वामी ने कहा…

जाकिर भाई...क्या बात है....सुभानाल्लाह...बेहतरीन रचना.
नीरज